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डिजिटल सिग्नेचर ने खोली सरकारी लापरवाही की पोल!

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Blunder in Bhind death certificate – entire district named dead, digital signature reveals official negligence.

Death certificate blunder in Bhind names entire district as deceased – viral administrative mistake

Death certificate mistakenly declares Bhind district as deceased; Tehsildar’s signature under scrutiny – mpsamwad.com

Digital signature exposes government negligence!

Malkhan Singh Parmar, Special Correspondent, Morena, MP Samwad.

भिंड में प्रशासनिक लापरवाही की हद पार! तहसीलदार ने एक व्यक्ति की जगह पूरे जिले ‘भिंड’ को मृत घोषित कर दिया। डिजिटल सिग्नेचर ने इस गलती को उजागर किया, जिससे सरकारी कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए। सोशल मीडिया पर मामला वायरल, कार्रवाई शुरू।

A shocking clerical error in Bhind! A death certificate named the entire district as deceased. The Tehsildar’s digital signature exposed the blunder, sparking public outrage and viral reactions. Officials blame the public service center, but the mistake has raised serious questions about administrative accountability.

MP संवाद, भिंड। जिले में एक हैरान कर देने वाली लापरवाही सामने आई है। तहसील कार्यालय से जारी एक मृत्यु प्रमाण पत्र (Death Certificate) में मृतक के नाम की जगह खुद जिले का नाम “भिंड” दर्ज कर दिया गया। इस गलती ने न सिर्फ प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि सोशल मीडिया पर भी मज़ाक का विषय बन गया है।

? कहां हुई गलती?

यह मामला भिंड शहर के चतुर्वेदी नगर निवासी गोविंद के पिता रामहेत की मृत्यु से जुड़ा है, जिनका निधन वर्ष 2018 में हुआ था। अप्रैल 2025 में जब परिवार ने मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया, तो 5 मई 2025 को तहसील कार्यालय से जारी सर्टिफिकेट में मृतक का नाम, पता और स्थान तीनों जगह “भिंड” लिखा पाया गया।

?‍♂️ तहसीलदार ने झाड़ा पल्ला, लोक सेवा केंद्र पर ठीकरा

जब इस लापरवाही के बारे में तहसीलदार माखनलाल शर्मा से सवाल किया गया, तो उन्होंने इसे मात्र एक टाइपिंग मिस्टेक करार दिया और इसके लिए लोक सेवा केंद्र को जिम्मेदार ठहराया। इतना ही नहीं, केंद्र संचालक पर ₹25,000 का जुर्माना भी लगा दिया गया।

? लेकिन सर्टिफिकेट पर तहसीलदार के डिजिटल सिग्नेचर?

सवाल यह भी उठता है कि तहसीलदार ने प्रमाण पत्र पर डिजिटल हस्ताक्षर करने से पहले दस्तावेज़ की जांच क्यों नहीं की? आखिर उनकी भी जिम्मेदारी बनती है।

⚖️ तहसीलदार पर प्रशासन की कार्रवाई

इस मामले में अपर कलेक्टर एल.के. पांडेय ने तहसीलदार माखनलाल शर्मा की गलती मानते हुए उन्हें तहसील कार्यालय से हटाकर भू-अभिलेख विभाग में अटैच कर दिया है।

❓ अब सवाल ये है…

जब एक जिले का नाम ही मृतक के रूप में दर्ज हो सकता है, तो आम जनता अपने दस्तावेजों की शुद्धता और विश्वसनीयता की उम्मीद कैसे करे? यह घटना सरकारी सिस्टम की लापरवाहियों की गंभीरता को उजागर करती है।

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