नोटिस ने मचाया हड़कंप, हरदा की पेयजल व्यवस्था पर सवाल.
Court notice raises concerns over Harda’s drinking water safety and municipal accountability.
Notice Sparks Panic, Questions Raised Over Harda’s Drinking Water System.
Special Correspondent, Richa Tiwari, Harda, MP Samwad News.
MP संवाद, हरदा। स्वच्छता और सुरक्षित पेयजल के दावे करने वाली हरदा नगर पालिका की पोल अब कोर्ट में खुल गई है। नालियों के भीतर से गुजर रही पेयजल पाइपलाइनों और लचर जल व्यवस्था को लेकर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने नगर पालिका के CMO और अध्यक्ष को नोटिस जारी किया है।
यह नोटिस सिर्फ एक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल है—क्या हरदा के नागरिकों को नालियों से मिला पानी पीने पर मजबूर किया जा रहा है?
अधिवक्ता की पहल से उठा मामला
अधिवक्ता गगन अग्रवाल द्वारा 9 जनवरी को जन उपयोगी लोक अदालत में दाखिल आवेदन में साफ कहा गया कि नगर पालिका की लापरवाही के चलते गंदा पानी आमजन के घरों तक पहुंच सकता है। आवेदन में यह भी चेतावनी दी गई कि यह स्थिति किसी भी समय स्वास्थ्य संकट का रूप ले सकती है।
कोर्ट ने माना गंभीर मामला
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने इसे विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम 1987 की धारा 22(बी) के तहत लोक उपयोगी सेवा से जुड़ा गंभीर प्रकरण मानते हुए CMO कमलेश पाटीदार और नगर पालिका अध्यक्ष भारती कमेडिया को नोटिस जारी किया।
अब जवाब देना होगा
कोर्ट के नोटिस के बाद नगर पालिका प्रशासन में खलबली मची हुई है। सवाल साफ है—क्या अब तक नालियों में बिछी पेयजल लाइनों की जानकारी प्रशासन को नहीं थी? यदि थी, तो सुधार क्यों नहीं हुआ?
हरदा के नागरिक अब यह जानना चाहते हैं कि उन्हें शुद्ध पानी मिलेगा या सिर्फ नोटिस और फाइलों में समाधान चलता रहेगा।
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