नवजात की जान बचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने दिखाया तत्परता और संवेदनशीलता.
Visual representation of a life-saving operation for a newborn under the RBSK scheme in Jabalpur.
Jabalpur health officials act swiftly to save a newborn under RBSK scheme
Health Department Demonstrated Promptness and Sensitivity to Save Newborn’s Life.
Special Correspondent, Jabalpur, MP Samwad.
जबलपुर स्वास्थ्य विभाग ने समय रहते एक नवजात की जान बचाने के लिए त्वरित और संवेदनशील कदम उठाए। दिल में छेद होने के कारण नवजात की हालत गंभीर थी, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की तत्परता से उसे तत्काल इलाज के लिए मुंबई रवाना किया गया, जिससे उसकी जिंदगी बचाई गई।
In a race against time, Jabalpur’s Health Department swiftly intervened to save the life of a newborn suffering from a heart defect. With coordinated efforts and urgent medical procedures, the infant was quickly transported for specialized treatment, highlighting the importance of responsive healthcare systems in critical situations.
MP संवाद, जबलपुर, पाटन निवासी स्वप्निल पटेल के 15 दिन के नवजात बेटे विनायक की हालत बिगड़ने पर निजी अस्पताल में पता चला कि उसके दिल में छेद है। डॉक्टरों ने राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) के तहत सरकारी मदद लेने की सलाह दी। परिजनों के फोन पर जिला प्रबंधक सुभाष शुक्ला ने अवकाश के दिन भी कार्यालय खुलवाया और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजय मिश्रा को भी बुलाया। पूरी कागजी प्रक्रिया त्वरित रूप से पूर्ण कर नवजात को उपचार के लिए मुंबई रवाना कर दिया गया।
गंभीर हालत में स्वास्थ्य केंद्र पहुंचा नवजात
डॉ. संजय मिश्रा ने बताया कि समय पर इलाज न मिलने से खतरा था, इसलिए छुट्टी के दिन भी विभाग ने फुर्ती दिखाई। इस संवेदनशीलता ने नवजात की जिंदगी बचाने में अहम भूमिका निभाई। बता दें कि 15 दिन के नवजात शिशु की अचानक हालत खराब होने पर उसके माता-पिता उसे लेकर निजी अस्पताल भागे थे, जिसके बाद उन्हें स्वास्थ्य केंद्र जाने की सलाह दी गई।
विभाग ने दिखाई फुर्ती
स्वप्निल पटेल के 15 दिन के नवजात बेटे विनायक को अचानक परेशानी आने लगी। हालत बिगड़ने पर उसके माता-पिता उसे लेकर निजी अस्पताल पहुंचे, जहां पता चला कि उसके दिल में छेद है। डॉक्टरों ने राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) के तहत सरकारी मदद लेने की सलाह दी। परिजनों के फोन पर जिला प्रबंधक सुभाष शुक्ला ने अवकाश के दिन भी कार्यालय खुलवाया और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजय मिश्रा को भी बुलाया।