अब कब तक चलेगी यह लूट? कटनी में आधार केंद्रों पर जनता का सब्र टूटने लगा!
For How Long Will This Looting Continue? Public Patience Runs Thin at Katni’s Aadhaar Centers!
Mohan Nayak, Special Correspondent, Katni, MP Samwad.
Katni’s Aadhaar centers in chaos! Poor laborers lose wages waiting in endless queues due to server failures. Authorities turn blind eye as public outrage grows. Congress leader demands immediate expansion of centers. Will the administration act?”
MP Samwad कटनी। आधार कार्ड संबंधी समस्याओं के निवारण के लिए शहर में स्थापित किए गए आधार केंद्रों की संख्या अत्यंत कम है, जिसके चलते रोजाना भीड़ और अराजकता का माहौल बना रहता है। लोगों को घंटों लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ता है, लेकिन फिर भी उनका काम पूरा होने की कोई गारंटी नहीं होती। अक्सर, दिनभर की प्रतीक्षा के बाद लोगों को खाली हाथ लौटना पड़ता है और अगले दिन फिर से वही संघर्ष शुरू हो जाता है। यह स्थिति प्रशासन की उदासीनता को उजागर करती है, जिस पर न तो कलेक्टर और न ही संबंधित विभाग के अधिकारी कोई ठोस कार्रवाई करते दिखाई देते हैं।
400 रुपए की दिहाड़ी छोड़, आधार के चक्कर में फंसे मजदूर
जिले के आधार केंद्रों पर मनमानी और अव्यवस्था का बोलबाला है। गरीब मजदूर, जो अपने बच्चों के भविष्य के लिए आधार संबंधी कार्य कराने आते हैं, उन्हें घंटों धूप और बेचैनी भरे माहौल में कतार में खड़ा रहना पड़ता है। प्यास लगने पर वे अपनी जगह किसी को बताकर बाहर जाते हैं, जहाँ पानी या नाश्ते पर 50-100 रुपए खर्च होते हैं। लेकिन लौटने पर पता चलता है कि “सर्वर डाउन” या “लिंक फेल” के कारण किसी का भी काम नहीं हुआ। इस तरह, पूरा दिन बर्बाद हो जाता है, और अगले दिन फिर से 400 रुपए की दिहाड़ी गंवाकर वे कतार में लगते हैं। कुल मिलाकर, आधार बनवाने की प्रक्रिया में एक गरीब व्यक्ति को 900-1000 रुपए तक का नुकसान उठाना पड़ता है।
कांग्रेस नेता ने उठाई आवाज, मांगे अतिरिक्त केंद्र
इस समस्या को लेकर जिला कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष जितेंद्र गुप्ता ‘जीतू’ ने प्रशासन से मांग की है कि शहर में आधार केंद्रों की संख्या बढ़ाई जाए और स्कूली बच्चों के लिए अलग से विशेष केंद्र स्थापित किए जाएँ। उनका कहना है कि इससे गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को अनावश्यक खर्च और प्रशासनिक लापरवाही से राहत मिलेगी।