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न योजना बची, न शवदाह गृह! एक करोड़ की बर्बादी पर सन्नाटा.

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Neglected gas crematorium in Katni exposes ₹1 crore public fund misuse, leaving grieving families with no proper facility.

Abandoned gas crematorium building in Katni highlighting government negligence and corruption

कटनी का गैस शवदाह गृह लापरवाही के चलते खंडहर में तब्दील — योजना पर खर्च हुए थे 1 करोड़ रुपये

No Project Left, No Crematorium Standing! Silence Over the Ruin of One Crore Rupees.

A ₹1 crore gas-based crematorium in Katni lies abandoned due to official negligence. Built with DMF funds, it ran briefly before breaking down. No trained operator was ever hired. Citizens now face high wood costs while the machine rusts away, exposing corruption and municipal failure.

MP संवाद, कटनी। नगर निगम की लापरवाही ने एक करोड़ रुपये की सार्वजनिक योजना को पूरी तरह नाकाम कर दिया है। नदीपार स्थित मुक्तिधाम में निर्मित गैस-आधारित शवदाह गृह अब खंडहर में तब्दील हो चुका है, जबकि इसके निर्माण पर 53 लाख रुपये और जनरेटर आदि पर 50 लाख रुपये का अतिरिक्त खर्च किया गया था।

योजना ध्वस्त, अफसरों की अनदेखी उजागर

मुक्तिधाम में लगे बोर्ड के अनुसार, यह शवदाह गृह 2017 में जिला खनिज प्रतिष्ठान (DMF) की योजना के तहत बनाया गया था और 2020 में इसे चालू भी किया गया। लेकिन कुछ ही समय बाद मशीन के पुर्जे खराब हो गए। निगम अधिकारियों और ठेकेदार के बीच वर्षों तक पत्राचार चलता रहा, लेकिन ठेकेदार मरम्मत के लिए पुर्जे ले जाने के बाद कभी लौटा ही नहीं। आश्चर्य की बात यह है कि निगम ने पहले ही पूरा भुगतान कर दिया था, फिर भी मशीन आज तक दुरुस्त नहीं हो सकी।

प्रशिक्षित ऑपरेटर नहीं, सिस्टम फेल

मशीन बंद होने की एक प्रमुख वजह यह भी रही कि न तो कोई प्रशिक्षित ऑपरेटर नियुक्त किया गया और न ही कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया गया। महापौर प्रीति संजीव सूरी द्वारा कराई गई जांच में यह गंभीर लापरवाही और संभावित भ्रष्टाचार उजागर हुआ। अब निगम के अधिकारी ठेकेदार की तलाश में जुटे हैं, जबकि मुक्तिधाम विकास समिति ने ठेकेदार के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की है।

लकड़ी की कालाबाजारी से शोक संतप्तों को दोहरी मार

इस बीच, लकड़ी की व्यवस्था निजी हाथों में होने के कारण अंतिम संस्कार के लिए परिजन परेशान हैं। लकड़ी पत्थर से तौलकर बेची जाती है और 3 क्विंटल लकड़ी के लिए 3,500 रुपये वसूले जा रहे हैं। कोरोना काल के सबक के बावजूद निगम ने कोई सुधार नहीं किया, और यह गैस शवदाह गृह आज केवल एक ‘कागजी योजना’ बनकर रह गया है।

अधिकारियों की प्रतिक्रियाएँ:

प्रीति संजीव सूरी, महापौर:
“गैस शवदाह गृह बंद पड़ा है, लेकिन इसे दोबारा चालू कराने के प्रयास जारी हैं।”

नीलेश दुबे, नगर आयुक्त:
“व्यवस्था को जल्द दुरुस्त किया जाएगा।”

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