अधिकारियों की चुप्पी और पार्षदों का हमला – कटनी निगम परिषद में गरमाया माहौल.
Tense moments at Katni Municipal Council as budget discussions lead to adjournment.
Councillors argue during the adjourned Katni Municipal Council budget meeting.
Officers Remained Silent, Councillors Attacked – Tensions Rise in Katni Municipal Council Meeting.
MP संवाद, कटनी। बजट सत्र को लेकर आयोजित नगर निगम परिषद का सम्मिलन बिना बजट पर चर्चा किए हंगामे के कारण स्थगित करना पड़ा। अब पुनः 28 मई को निगम परिषद की बैठक बुलाई गई है।
सम्मिलन की शुरुआत में ही बजट में लेट-लतीफी को लेकर पार्षदों ने निगम अधिकारियों पर आरोप लगाए। पार्षदों के सवालों पर निगम अधिकारी जवाब देने की बजाय उल्टी-सीधी जानकारी देकर परिषद को गुमराह करते नजर आए।
सवालों से घिरी परिषद
बजट में देरी को लेकर निगम अधिकारी संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। पार्षद राजेश भास्कर ने नियमों का हवाला देते हुए इस पर आपत्ति जताई। कांग्रेस के पार्षदों ने भी अधिकारियों को आड़े हाथों लिया। एमआईसी ने 9 अप्रैल को बजट पास किया था। इस पर कांग्रेस के पार्षद मिथलेश जैन ने कहा कि 1 से 8 अप्रैल के बीच बगैर बजट के ही निगम का कार्य चलता रहा। निगमायुक्त ने नियमों का हवाला देकर सदन को संतुष्ट करने का प्रयास किया।
पार्षद मिथलेश जैन ने नगर निगम की संपत्तियों पर सवाल उठाए। स्टेशन के पास निर्मित शॉपिंग कॉम्प्लेक्स के मामले में जिस तरह से ठेकेदार के पक्ष में करोड़ों रुपए का निर्णय न्यायालय ने दिया है, उस पर उन्होंने कहा कि यही हाल रहा तो निगम की इमारतें बिकने की नौबत आ जाएगी। झंडा बाजार में प्रसाधन की जगह पर अवैध कब्जा, पुरानी कचहरी में सामुदायिक हॉल और भवन सहित आयुक्त बंगले के सामने और बाजू में स्थित बंगले पर कब्जा हटाकर तीन माह में उन्हें निगम के उपयोग में लेने की मांग की। बजट एजेंडे पर निगम की संपत्तियों को शामिल नहीं किए जाने पर उन्होंने अधिकारियों को नगर निगम अधिनियम का ज्ञान भी कराया।
अवैध कब्जे हटाए जाएं: संदीप जायसवाल
सम्मेलन में विशेष रूप से मौजूद विधायक संदीप जायसवाल ने निगम की संपत्तियों पर अन्य विभागों के कब्जे को लेकर आपसी सामंजस्य की बात करते हुए अवैध कब्जे हटाने की मांग की। इसके साथ ही अन्य मुद्दों पर उन्होंने कहा कि अधिनियम के अनुसार ही कार्य किया जाए।
अवैध कब्जे हटाए जाएं: संदीप जायसवाल
सम्मेलन में विशेष रूप से मौजूद विधायक संदीप जायसवाल ने निगम की संपत्तियों पर अन्य विभागों के कब्जे को लेकर आपसी सामंजस्य की बात करते हुए अवैध कब्जे हटाने की मांग की। इसके साथ ही अन्य मुद्दों पर उन्होंने कहा कि अधिनियम के अनुसार ही कार्य किया जाए।
सम्मेलन पर एक नज़र
◆ पहलगाम की घटना की सदन में निंदा, सेना और मिशन सिंदूर की सराहना
◆ बिजली की आपूर्ति को लेकर चर्चा
◆ नालों की सफाई में ठेके का मामला उठा
◆ सुधार न्यास की भूमि पर उपयंत्री का कब्जा
◆ स्थगन के नाम पर अमले की बहानेबाजी
◆ सुरम्य पार्क के स्वीमिंग पूल का मामला
◆ मार्गों के नामांकरण को लेकर चर्चा
◆ ईई पर निगमाध्यक्ष ने जताई नाराजगी
◆ धारा 17 की पूरे समय चर्चा रही
◆ जनप्रतिनिधि प्रकोष्ठ बना कागजी घोड़ा
◆ पूर्व अतिक्रमण अधिकारी पर मेहरबानी
◆ एमआईसी सदस्य देते रहे जवाब
◆ महापौर ने भी विकास कार्यों की जानकारी दी
◆ सम्मिलन से अन्य काम-काज प्रभावित
नगर में दुग्ध डेयरियों का संचालन और पशुपालन के संबंध में उमेन्द्र अहिरवार के प्रश्नों पर चर्चा हुई। पार्षदों ने बताया कि किस तरह जगह-जगह डेयरियों के संचालन से परेशानी होती है। नगर में फुटकर फल/सब्जी बाजार, अवैध प्लाटिंग और अनाधिकृत कॉलोनियों में विकास, शहर में लगे यूनिपोल, गेन्ट्री गेट के संबंध में भी पार्षदों और अधिकारियों के बीच चर्चा हुई। श्याम पंजवानी, ईश्वर बहरानी, सुखदेव चौधरी, लव साहू, सुमित्रा रावत, प्रभा गुप्ता सहित अन्य लोगों ने सवाल किए। नेता प्रतिपक्ष रागनी गुप्ता, राजकुमारी जैन, शशिकांत तिवारी सहित अन्य पार्षद उपस्थित रहे।
चिकित्सा भत्ता बढ़ाने पर जोर
नगरीय निकाय में कार्यरत अधिकारियों/कर्मचारियों को चिकित्सा भत्ता बढ़ाने की मांग उठी। कांग्रेस के पार्षद एडवोकेट मौसूफ बिट्टू ने चिकित्सा भत्ते की जानकारी मांगी। अधिकारियों ने 300 रुपए दिए जाने की बात कही, जिस पर पार्षदों ने कहा कि अन्य नगर निगमों में यह राशि 1000 से 1500 रुपए तक दी जाती है। उन्होंने मांग की कि निगम के कर्मचारियों को 1500 से 2000 रुपए तक चिकित्सा भत्ता दिया जाए।