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जल संकट की गंभीर तस्वीर: कलेक्टर ने घोषित किया पूरा कटनी जिला जल अभावग्रस्त.

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Katni’s water crisis intensifies; district declared water-scarce till July, borewell ban imposed.

Dry cracked land in Katni symbolizing water scarcity, administrative restrictions on borewell drilling

Water Crisis in Katni: District Administration Declares Area Water-Scarce, Drilling Prohibited Without Permission

Severe Water Crisis Unfolds: Collector Declares Entire Katni District as Water-Scarce.

कटनी जिले को जल संकट के चलते कलेक्टर दिलीप कुमार यादव ने 31 जुलाई तक जल अभावग्रस्त घोषित किया। जिले में बिना अनुमति जल दोहन, नलकूप निर्माण पर रोक लगाई गई है। आदेश का उल्लंघन करने पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू है।

Mohan Nayak, Special Correspondent, Katni, MP Samwad.

Due to water scarcity, Katni Collector Dilip Kumar Yadav has declared the district water-scarce till July 31. Unauthorized water use and borewell drilling are now prohibited. Violators will face strict legal action. This order takes immediate effect to safeguard water resources for essential domestic use.

MP कटनी। कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट श्री दिलीप कुमार यादव ने मध्यप्रदेश पेयजल परिरक्षण अधिनियम के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए जिले के सभी विकासखंडों एवं नगरीय क्षेत्रों को 31 जुलाई या आगामी आदेश तक जल अभावग्रस्त क्षेत्र घोषित कर दिया है।

कलेक्टर श्री यादव ने मंगलवार को आदेश जारी करते हुए संपूर्ण जिले को जल अभावग्रस्त क्षेत्र घोषित किया। आदेश के अनुसार अब कोई भी व्यक्ति बिना अनुमति के, शासकीय भूमि पर स्थित जल स्रोतों से पेयजल और घरेलू प्रयोजनों को छोड़कर किसी अन्य उद्देश्य से जल का दोहन नहीं कर सकेगा। नहरों में प्रवाहित जल को छोड़कर अन्य सभी जल स्रोतों का उपयोग प्रतिबंधित रहेगा।

जिले के सभी विकासखंडों और नगरीय क्षेत्रों में स्थित नदियाँ, नाले, स्टॉप डैम, सार्वजनिक कुएं तथा अन्य जल स्रोत केवल घरेलू उपयोग हेतु आरक्षित किए गए हैं।

इस आदेश के अंतर्गत कोई भी व्यक्ति या निजी ठेकेदार, अनुविभागीय अधिकारी राजस्व की पूर्व अनुमति के बिना, किसी भी प्रयोजन के लिए निजी भूमि पर नया नलकूप नहीं खनन कर सकेगा। यह प्रतिबंध शासकीय नलकूपों पर लागू नहीं होगा।

निजी भूमि पर नलकूप खनन के लिए संबंधित व्यक्ति को निर्धारित प्रारूप एवं शुल्क के साथ अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) को आवेदन देना होगा। अधिकारी आवश्यक जांच-पड़ताल के उपरांत लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सहायक यंत्री से अनुशंसा प्राप्त करेंगे। जनहित में आवश्यकतानुसार, अधिकारी पेयजल परिरक्षण संशोधित अधिनियम 2022 के प्रावधानों के तहत निजी जल स्रोतों का अधिग्रहण कर सकेंगे।

यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। इसका उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध मध्यप्रदेश पेयजल परिरक्षण अधिनियम 1986 की धारा 9 और भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 के तहत दंडात्मक कार्यवाही की जाएगी।

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