लापरवाही की सजा तय—384 कर्मियों को कारण बताओ नोटिस.
Guna administration takes strict action against Anganwadi workers found absent from headquarters during inspections.
Punishment for negligence decided — 384 workers served show-cause notices.
Special Correspondent, Richa Tiwari, Guna, MP Samwad News.
MP संवाद, गुना। बच्चों का पोषण, गर्भवती महिलाओं की देखभाल और सरकारी योजनाओं की रीढ़ माने जाने वाले आंगनबाड़ी केंद्र—गुना में इन्हें मनमर्जी का अड्डा बना दिया गया था। लेकिन अब प्रशासन ने साफ कर दिया है— सरकारी सेवा, अप-डाउन की छूट नहीं है।
कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल के कड़े तेवरों के बाद महिला एवं बाल विकास विभाग ने इतिहास की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए 384 आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिकाओं को सेवा समाप्ति का नोटिस थमा दिया है।
मुख्यालय कागजों में, हकीकत में शहर से शहर
आरोन, बमोरी, चाचौड़ा, गुना ग्रामीण और राघौगढ़ परियोजनाओं में कार्यरत सैकड़ों कार्यकर्ता अपने मुख्यालय पर रहने के बजाय रोज़ अप-डाउन कर रही थीं। नतीजा— केंद्र देर से खुलते, कई बार बंद ही रहते।
बच्चों और गर्भवती महिलाओं के हक पर डाका
इनकी लापरवाही का सबसे बड़ा नुकसान उन बच्चों और महिलाओं को हुआ, जिनके लिए आंगनबाड़ी जीवनरेखा है। पोषण आहार समय पर नहीं मिला, योजनाएं कागजों तक सिमट कर रह गईं।
औचक निरीक्षण में खुली पूरी सच्चाई
जब औचक निरीक्षण हुआ तो परत-दर-परत सच्चाई सामने आई। उपस्थिति ऐप पर लोकेशन कहीं और, हाजिरी कहीं और—यानी सिस्टम के साथ खुला खेल।
अब जवाब दो या नौकरी छोड़ो
प्रशासन ने साफ संदेश दे दिया है—
या तो संतोषजनक जवाब दो, या फिर नौकरी छोड़ने के लिए तैयार रहो।
यह कार्रवाई सिर्फ अनुशासन की नहीं, बल्कि उन मासूम बच्चों और महिलाओं के हक की लड़ाई है, जिनका भविष्य इन केंद्रों से जुड़ा है। अब देखना यह है कि क्या यह सख्ती व्यवस्था को सुधारेगी या फिर सिर्फ कागजी कार्रवाई बनकर रह जाएगी।
